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Diabetes और आंखों का संबंध: डायबिटीज से आंखों को कैसे बचाएं?

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Diabetes और आंखों का संबंध: डायबिटीज से आंखों को कैसे बचाएं?

Sangam Eye
Sangam EyeAuthor
Published: Oct 2, 2026
Diabetes और आंखों का संबंध: डायबिटीज से आंखों को कैसे बचाएं?
Sangam Super Speciality Eye Hospital • Gorakhpur
Article Summary & Key Insights

Diabetes और आंखों का संबंध जानें। डायबिटीज से होने वाली Diabetic Retinopathy, धुंधली नजर, मोतियाबिंद और ग्लूकोमा के लक्षण, बचाव व इलाज के बा...

Diabetes और आंखों का संबंध: डायबिटीज से आंखों को कैसे बचाएं?

डायबिटीज यानी मधुमेह एक ऐसी स्वास्थ्य समस्या है, जो शरीर में ब्लड शुगर के स्तर को प्रभावित करती है। यदि लंबे समय तक ब्लड शुगर नियंत्रित न रहे, तो इसका असर शरीर के कई अंगों के साथ-साथ आंखों पर भी पड़ सकता है। शुरुआत में व्यक्ति को आंखों में कोई खास परेशानी महसूस नहीं होती, लेकिन समय के साथ नजर धुंधली होने, रेटिना की रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचने और गंभीर मामलों में दृष्टि कम होने का खतरा बढ़ सकता है।

Diabetes और आंखों का संबंध समझना इसलिए जरूरी है, क्योंकि डायबिटीज से होने वाली कई आंखों की बीमारियां शुरुआती अवस्था में स्पष्ट लक्षण नहीं दिखाती हैं। नियमित आंखों की जांच, ब्लड शुगर का सही प्रबंधन और समय पर इलाज करके आंखों को होने वाले नुकसान के जोखिम को कम किया जा सकता है।

इस लेख में हम जानेंगे कि डायबिटीज आंखों को कैसे प्रभावित करती है, Diabetic Retinopathy क्या है, इसके लक्षण क्या हैं और डायबिटीज से आंखों की रोशनी को सुरक्षित रखने के लिए कौन-सी सावधानियां जरूरी हैं।

1. Diabetes और आंखों का संबंध क्या है?

डायबिटीज में शरीर इंसुलिन का सही तरीके से उपयोग नहीं कर पाता या पर्याप्त इंसुलिन नहीं बना पाता। इसके कारण खून में ग्लूकोज यानी शुगर का स्तर बढ़ सकता है। लंबे समय तक ब्लड शुगर अधिक रहने से शरीर की छोटी रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंच सकता है। आंखों के पिछले हिस्से में मौजूद रेटिना की रक्त वाहिकाएं भी इससे प्रभावित हो सकती हैं।

रेटिना आंख का वह संवेदनशील हिस्सा है, जो प्रकाश को ग्रहण करके मस्तिष्क तक दृश्य संबंधी संकेत पहुंचाने में मदद करता है। रेटिना को स्वस्थ रखने के लिए उसकी रक्त वाहिकाओं का ठीक तरह से काम करना जरूरी है। जब इन वाहिकाओं को नुकसान पहुंचता है, तो आंखों की देखने की क्षमता प्रभावित हो सकती है।

डायबिटीज से आंखों पर पड़ने वाले प्रभाव व्यक्ति की बीमारी की अवधि, ब्लड शुगर नियंत्रण, ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल और अन्य स्वास्थ्य स्थितियों पर निर्भर करते हैं। इसलिए डायबिटीज होने पर आंखों की नियमित जांच को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

2. Diabetic Retinopathy क्या है?

Diabetic Retinopathy डायबिटीज से जुड़ी आंखों की एक प्रमुख बीमारी है। इसमें लंबे समय तक बढ़ा हुआ ब्लड शुगर रेटिना की छोटी रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचा सकता है। ये रक्त वाहिकाएं कमजोर होकर उनमें से तरल पदार्थ का रिसाव कर सकती हैं, उनमें रुकावट आ सकती है या वे रक्तस्राव कर सकती हैं। गंभीर अवस्था में आंख के पिछले हिस्से में असामान्य नई रक्त वाहिकाएं भी बनने लगती हैं।

Diabetic Retinopathy की शुरुआती अवस्था में कई लोगों को दिखाई देने में कोई परेशानी नहीं होती। इसका मतलब यह नहीं है कि आंखें पूरी तरह सुरक्षित हैं। बीमारी का पता केवल लक्षणों के आधार पर नहीं लगाया जा सकता; इसके लिए आंखों के डॉक्टर द्वारा रेटिना की जांच जरूरी होती है।

Diabetic Retinopathy की प्रमुख अवस्थाएं

Non-Proliferative Diabetic Retinopathy (NPDR)

यह बीमारी की शुरुआती या मध्यम अवस्था हो सकती है। इसमें रेटिना की छोटी रक्त वाहिकाएं कमजोर हो सकती हैं और उनमें सूजन, छोटे उभार या रिसाव दिखाई दे सकते हैं। इस चरण में व्यक्ति की नजर सामान्य भी रह सकती है, इसलिए नियमित जांच महत्वपूर्ण है।

Proliferative Diabetic Retinopathy (PDR)

यह अधिक गंभीर अवस्था है। इसमें रेटिना में ऑक्सीजन की कमी के कारण असामान्य नई रक्त वाहिकाएं बनने लगती हैं। ये वाहिकाएं नाजुक होती हैं और आसानी से खून बहा सकती हैं। इनके कारण आंख के अंदर रक्तस्राव, निशान बनने और रेटिना के खिंचने या अलग होने जैसी जटिलताएं हो सकती हैं। समय पर उपचार न मिलने पर दृष्टि को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है।

3. डायबिटीज से आंखों में कौन-कौन सी समस्याएं हो सकती हैं?

डायबिटीज का असर केवल रेटिना तक सीमित नहीं रहता। इससे आंखों की कई अन्य समस्याओं का जोखिम भी बढ़ सकता है।

Diabetic Macular Edema

मैक्युला रेटिना का वह हिस्सा है, जो पढ़ने, चेहरे पहचानने और बारीक चीजें देखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। डायबिटीज के कारण रक्त वाहिकाओं से तरल पदार्थ रिसकर मैक्युला में जमा हो सकता है। इससे सूजन आती है और नजर धुंधली या विकृत हो सकती है। इस स्थिति को Diabetic Macular Edema कहा जाता है।

मोतियाबिंद (Cataract)

मोतियाबिंद में आंख का प्राकृतिक लेंस धुंधला होने लगता है। डायबिटीज से पीड़ित लोगों में मोतियाबिंद होने का जोखिम अधिक हो सकता है और कुछ लोगों में यह अपेक्षाकृत कम उम्र में भी विकसित हो सकता है। इसके कारण धुंधला दिखाई देना, रोशनी से परेशानी और रात में देखने में कठिनाई हो सकती है।

ग्लूकोमा (Glaucoma)

ग्लूकोमा आंख की ऑप्टिक नर्व को नुकसान पहुंचाने वाली बीमारियों का समूह है। डायबिटीज वाले लोगों में कुछ प्रकार के ग्लूकोमा का जोखिम बढ़ सकता है। ग्लूकोमा से होने वाली दृष्टि की क्षति स्थायी हो सकती है, इसलिए समय पर जांच और डॉक्टर की सलाह के अनुसार उपचार जरूरी है।

अस्थायी रूप से धुंधला दिखाई देना

ब्लड शुगर के स्तर में तेजी से बदलाव होने पर आंख के लेंस की बनावट और उसकी प्रकाश को फोकस करने की क्षमता अस्थायी रूप से प्रभावित हो सकती है। इससे नजर धुंधली लग सकती है। हालांकि, हर बार धुंधला दिखाई देने का कारण ब्लड शुगर ही हो, यह जरूरी नहीं है। लगातार या अचानक होने वाले बदलाव की जांच कराना महत्वपूर्ण है।

4. डायबिटीज से आंखों को नुकसान होने के लक्षण

डायबिटीज से जुड़ी आंखों की बीमारी शुरुआती चरण में बिना किसी स्पष्ट लक्षण के बढ़ सकती है। बीमारी बढ़ने पर निम्नलिखित लक्षण दिखाई दे सकते हैं:

  • दूर या पास की चीजें धुंधली दिखाई देना।
  • पढ़ने या बारीक काम करने में परेशानी होना।
  • आंखों के सामने काले धब्बे या तैरते हुए बिंदु दिखाई देना।
  • दृष्टि के किसी हिस्से में अंधेरा या खाली जगह महसूस होना।
  • सीधी रेखाएं टेढ़ी या विकृत दिखाई देना।
  • रंगों को पहचानने में बदलाव महसूस होना।
  • एक या दोनों आंखों की नजर में बदलाव आना।
  • गंभीर स्थिति में अचानक दृष्टि कम होना।

महत्वपूर्ण: यदि आपकी नजर सामान्य है, तब भी डायबिटीज से आंखों को नुकसान होने की संभावना पूरी तरह समाप्त नहीं होती। लक्षणों का इंतजार करने के बजाय नियमित जांच कराना बेहतर है।

5. डायबिटीज के मरीजों को आंखों की जांच कब करवानी चाहिए?

डायबिटीज से आंखों की समस्याओं का समय पर पता लगाने के लिए व्यापक नेत्र जांच और जरूरत के अनुसार पुतलियों को फैलाकर रेटिना की जांच कराना महत्वपूर्ण है। जांच की सही समय-सारणी डायबिटीज के प्रकार, बीमारी की अवधि, पिछली जांच के परिणाम और अन्य स्वास्थ्य स्थितियों पर निर्भर करती है।

  • Type 2 Diabetes: डायबिटीज का पता चलते ही व्यापक आंखों की जांच करानी चाहिए।
  • Type 1 Diabetes: आम तौर पर निदान के पांच साल के भीतर पहली व्यापक आंखों की जांच की सलाह दी जाती है। बच्चों, किशोरों और व्यक्तिगत जोखिम के अनुसार समय अलग हो सकता है।
  • नियमित फॉलो-अप: यदि रेटिना में कोई समस्या नहीं है, तो अक्सर सालाना जांच की सलाह दी जाती है। आंखों की बीमारी मिलने पर डॉक्टर इससे अधिक बार जांच कराने को कह सकते हैं।
  • गर्भावस्था: पहले से डायबिटीज होने पर गर्भधारण के दौरान जल्द नेत्र जांच करानी चाहिए और डॉक्टर की सलाह के अनुसार आगे की जांच करवानी चाहिए।
  • नजर में अचानक बदलाव: नियमित जांच की तारीख का इंतजार न करें। तुरंत नेत्र विशेषज्ञ से संपर्क करें।

डायबिटीज के मरीजों को केवल चश्मे का नंबर जांचने वाली सामान्य जांच के बजाय ऐसी व्यापक जांच के बारे में पूछना चाहिए जिसमें रेटिना और डायबिटीज से जुड़ी आंखों की समस्याओं का मूल्यांकन किया जा सके।

6. Diabetic Eye Checkup में कौन-कौन से टेस्ट हो सकते हैं?

नेत्र विशेषज्ञ आपकी स्थिति के अनुसार अलग-अलग जांच कर सकते हैं। इनमें निम्नलिखित शामिल हो सकते हैं:

Visual Acuity Test

इस जांच में यह देखा जाता है कि आप अलग-अलग दूरी पर कितनी स्पष्टता से देख पाते हैं। इससे दृष्टि की क्षमता का आकलन किया जाता है, लेकिन केवल यह टेस्ट रेटिना की सभी समस्याओं का पता लगाने के लिए पर्याप्त नहीं है।

Dilated Eye Examination

इस जांच में विशेष आई ड्रॉप्स से पुतलियों को फैलाया जाता है, ताकि डॉक्टर आंख के पिछले हिस्से और रेटिना को बेहतर तरीके से देख सकें। डायबिटीज से जुड़ी रेटिना की समस्याओं का पता लगाने के लिए यह एक महत्वपूर्ण जांच है।

OCT Scan

Optical Coherence Tomography (OCT) आंख के रेटिना की परतों की विस्तृत तस्वीर तैयार करता है। यदि डॉक्टर को मैक्युला में सूजन या अन्य समस्या का संदेह हो, तो वे इस जांच की सलाह दे सकते हैं।

Fundus Photography और अन्य जांच

जरूरत के अनुसार रेटिना की तस्वीरें या अन्य विशेष जांच की जा सकती हैं। कौन-सा टेस्ट आवश्यक है, यह डॉक्टर आंखों की स्थिति देखकर तय करते हैं। हर मरीज को सभी जांचों की आवश्यकता नहीं होती।

7. डायबिटीज से आंखों को सुरक्षित कैसे रखें?

डायबिटीज से जुड़ी आंखों की बीमारी का जोखिम कम करने के लिए नियमित स्वास्थ्य देखभाल और समय पर नेत्र जांच दोनों जरूरी हैं। निम्नलिखित कदम मददगार हो सकते हैं:

ब्लड शुगर नियंत्रित रखें

डॉक्टर द्वारा बताए गए उपचार, दवाओं या इंसुलिन का नियमित रूप से पालन करें। अपने डॉक्टर से व्यक्तिगत ब्लड शुगर और HbA1c लक्ष्य के बारे में चर्चा करें। दवाओं की खुराक अपने आप न बदलें और न ही बिना चिकित्सकीय सलाह के उन्हें बंद करें।

ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल पर ध्यान दें

ब्लड शुगर के साथ उच्च रक्तचाप और बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल भी आंखों की रक्त वाहिकाओं के लिए जोखिम बढ़ा सकते हैं। इनकी नियमित जांच करवाएं और डॉक्टर की सलाह के अनुसार इन्हें नियंत्रित रखें।

संतुलित आहार लें

अपने भोजन में सब्जियां, साबुत अनाज, दालें और अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थ शामिल करें। मीठे पेय और अतिरिक्त चीनी का सेवन सीमित रखें। भोजन की योजना अपनी स्वास्थ्य स्थिति और डॉक्टर या डाइटीशियन की सलाह के अनुसार बनाएं।

नियमित शारीरिक गतिविधि करें

डॉक्टर की सलाह के अनुसार नियमित शारीरिक गतिविधि ब्लड शुगर और समग्र स्वास्थ्य को नियंत्रित रखने में मदद कर सकती है। अपनी उम्र, स्वास्थ्य और शारीरिक क्षमता के अनुरूप गतिविधि चुनें।

धूम्रपान से बचें

धूम्रपान छोड़ना रक्त वाहिकाओं और समग्र स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है। यदि धूम्रपान छोड़ने में कठिनाई हो, तो स्वास्थ्य विशेषज्ञ की मदद लें।

आंखों की जांच न टालें

डायबिटीज होने पर आंखों की जांच केवल तभी न कराएं जब नजर धुंधली हो। बीमारी का पता शुरुआती चरण में लगाने के लिए नियमित फॉलो-अप जरूरी है। डॉक्टर द्वारा बताई गई अगली जांच की तारीख का पालन करें।

8. Diabetic Retinopathy का इलाज कैसे किया जाता है?

Diabetic Retinopathy का उपचार बीमारी की अवस्था, रेटिना को हुए नुकसान और दृष्टि पर पड़ रहे प्रभाव पर निर्भर करता है। हर मरीज को एक जैसा उपचार नहीं दिया जाता। नेत्र विशेषज्ञ जांच के बाद उपयुक्त विकल्प बताते हैं।

नियमित निगरानी

यदि बीमारी शुरुआती अवस्था में है और तत्काल उपचार की जरूरत नहीं है, तो डॉक्टर नियमित जांच के माध्यम से इसकी प्रगति पर नजर रख सकते हैं। इसके साथ ब्लड शुगर, ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखना महत्वपूर्ण है।

Anti-VEGF इंजेक्शन

कुछ मरीजों में आंख के अंदर Anti-VEGF दवाओं के इंजेक्शन दिए जा सकते हैं। इनका उपयोग असामान्य रक्त वाहिकाओं की वृद्धि कम करने या रेटिना की सूजन जैसी स्थितियों के उपचार में किया जाता है। इंजेक्शन की जरूरत और संख्या डॉक्टर तय करते हैं।

लेजर उपचार

कुछ प्रकार की डायबिटिक रेटिनोपैथी में लेजर उपचार की सलाह दी जा सकती है। इसका उद्देश्य बीमारी की प्रगति और दृष्टि को होने वाले आगे के नुकसान के जोखिम को कम करना होता है।

विट्रेक्टॉमी सर्जरी

यदि आंख के अंदर अधिक रक्तस्राव हो जाए या रेटिना पर गंभीर निशान बन जाएं, तो कुछ मामलों में Vitrectomy नामक सर्जरी की जरूरत हो सकती है। यह निर्णय आंख की स्थिति और अन्य चिकित्सकीय कारकों के आधार पर लिया जाता है।

ध्यान दें: उपचार से बीमारी को नियंत्रित करने और आगे दृष्टि हानि का जोखिम कम करने में मदद मिल सकती है, लेकिन पहले से हुई दृष्टि की क्षति हमेशा पूरी तरह वापस नहीं आती। इसलिए जल्दी पहचान और समय पर उपचार महत्वपूर्ण हैं।

9. डायबिटीज में अचानक नजर कम हो जाए तो क्या करें?

यदि आपको डायबिटीज है और अचानक नजर धुंधली होने लगे, आंखों के सामने नए काले धब्बे या बहुत सारे तैरते हुए बिंदु दिखाई दें, रोशनी की चमक महसूस हो, पर्दा आने जैसा लगे या दृष्टि अचानक कम हो जाए, तो तुरंत नेत्र विशेषज्ञ से संपर्क करें। ऐसे लक्षण रेटिना में रक्तस्राव या अन्य गंभीर समस्या से जुड़े हो सकते हैं।

गंभीर दर्द, आंख में चोट या अचानक दृष्टि जाने जैसी स्थिति में तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता लें। लक्षण अपने आप ठीक होने का इंतजार न करें और बिना सलाह के कोई आई ड्रॉप या घरेलू उपचार इस्तेमाल न करें।

10. Diabetes और आंखों का संबंध: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q1. क्या डायबिटीज से आंखों की रोशनी जा सकती है?

हां, यदि डायबिटीज से जुड़ी आंखों की बीमारी गंभीर हो जाए और समय पर उसका उपचार न मिले, तो स्थायी दृष्टि हानि हो सकती है। नियमित जांच, ब्लड शुगर नियंत्रण और सही समय पर उपचार से इस जोखिम को कम किया जा सकता है।

Q2. क्या डायबिटीज में बिना लक्षणों के भी आंखों को नुकसान हो सकता है?

हां। Diabetic Retinopathy की शुरुआती अवस्था में अक्सर कोई स्पष्ट लक्षण नहीं होते। इसलिए नजर सामान्य होने पर भी नियमित व्यापक आंखों की जांच जरूरी है।

Q3. डायबिटीज के मरीज को साल में कितनी बार आंखों की जांच करानी चाहिए?

कई मरीजों के लिए साल में कम से कम एक बार व्यापक आंखों की जांच उपयुक्त होती है। यदि रेटिना में समस्या हो या अन्य जोखिम मौजूद हों, तो डॉक्टर अधिक बार जांच कराने की सलाह दे सकते हैं। अपनी जांच का अंतराल नेत्र विशेषज्ञ से तय करें।

Q4. क्या ब्लड शुगर बढ़ने से धुंधला दिखाई दे सकता है?

हां। ब्लड शुगर में बदलाव आंख के लेंस की प्रकाश को फोकस करने की क्षमता को अस्थायी रूप से प्रभावित कर सकते हैं। हालांकि, धुंधली नजर के दूसरे कारण भी हो सकते हैं। यदि समस्या लगातार बनी रहे या अचानक शुरू हो, तो जांच कराएं।

Q5. क्या डायबिटिक रेटिनोपैथी का इलाज संभव है?

इसके लिए निगरानी, इंजेक्शन, लेजर उपचार या कुछ मामलों में सर्जरी जैसे विकल्प उपलब्ध हैं। उचित उपचार बीमारी की प्रगति को नियंत्रित करने और दृष्टि को आगे होने वाले नुकसान से बचाने में मदद कर सकता है। उपचार बीमारी की अवस्था पर निर्भर करता है।

Q6. क्या डायबिटीज के मरीज मोतियाबिंद की सर्जरी करवा सकते हैं?

कई मामलों में डायबिटीज के मरीज मोतियाबिंद की सर्जरी करवा सकते हैं। सर्जरी से पहले और बाद की योजना ब्लड शुगर नियंत्रण, रेटिना की स्थिति और मरीज के समग्र स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर बनाई जाती है। नेत्र विशेषज्ञ आवश्यक जांच के बाद सही सलाह देंगे।

Q7. क्या केवल ब्लड शुगर नियंत्रित रखने से आंखों की जांच की जरूरत खत्म हो जाती है?

नहीं। ब्लड शुगर को नियंत्रित रखना बहुत महत्वपूर्ण है, लेकिन इससे आंखों की बीमारी का जोखिम पूरी तरह समाप्त नहीं होता। नियमित आंखों की जांच और डॉक्टर द्वारा बताए गए फॉलो-अप को जारी रखना चाहिए।

निष्कर्ष

Diabetes और आंखों का संबंध समझना हर डायबिटीज मरीज के लिए जरूरी है। लंबे समय तक बढ़ा हुआ ब्लड शुगर रेटिना की रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचा सकता है और Diabetic Retinopathy, मैक्युलर एडिमा, मोतियाबिंद तथा ग्लूकोमा जैसी समस्याओं का जोखिम बढ़ा सकता है। इनमें से कुछ बीमारियां शुरुआत में बिना लक्षणों के भी बढ़ सकती हैं।

आंखों की रोशनी सुरक्षित रखने के लिए ब्लड शुगर, ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखें, संतुलित जीवनशैली अपनाएं और डॉक्टर द्वारा सुझाई गई नियमित आंखों की जांच करवाएं। यदि नजर में अचानक कोई बदलाव आए, तो तुरंत नेत्र विशेषज्ञ से संपर्क करें। समय पर जांच और उपचार आंखों के स्वास्थ्य की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

Sangam Super Speciality Eye Hospital में आंखों की जांच

यदि आपको डायबिटीज है, तो अपनी आंखों की सेहत को नजरअंदाज न करें। रेटिना और आंखों से जुड़ी समस्याओं का पता लगाने के लिए नेत्र विशेषज्ञ से व्यापक आंखों की जांच के बारे में सलाह लें। आपकी जांच और उपचार की जरूरत आपकी व्यक्तिगत स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार तय की जानी चाहिए।

Sangam Super Speciality Eye Hospital Taramandal, In Front of Vasundhara Enclave, Gorakhpur, Uttar Pradesh – 273010 फोन: +91 757 000 8880

अपनी आंखों की जांच के लिए अस्पताल से संपर्क करें और डॉक्टर की सलाह के अनुसार नियमित फॉलो-अप करवाएं।

मेडिकल डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के लिए है। यह किसी डॉक्टर की जांच, निदान या उपचार का विकल्प नहीं है। आंखों से संबंधित लक्षण होने पर योग्य नेत्र विशेषज्ञ से सलाह लें।

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Dr. Y. Singh
Medically Reviewed17+ Years Experience

Dr. Y. Singh (MBBS, MS Ophthalmology)

Chief Ophthalmic Surgeon at Sangam Super Speciality Eye Hospital. Expert in Micro-Incision Phaco Cataract Surgery, Blade-Free LASIK, and Glaucoma management.

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