बच्चों की आंखों की जांच कब करवानी चाहिए? पूरी जानकारी
बच्चों की आंखों की जांच कब करवानी चाहिए? पूरी जानकारी
बच्चों की आंखों की जांच कब करवानी चाहिए? जानिए किस उम्र में बच्चों की vision screening जरूरी है, आंखों के लक्षण, चश्मे की जरूरत, squint, laz...
बच्चों की आंखों की जांच कब करवानी चाहिए? जानिए सही उम्र, लक्षण और जरूरी Eye Tests
बच्चों की आंखों की जांच कब करवानी चाहिए? यह सवाल लगभग हर माता-पिता के मन में आता है। अक्सर parents यह मान लेते हैं कि अगर बच्चा टीवी देख पा रहा है, किताब पढ़ पा रहा है या स्कूल में सामान्य रूप से पढ़ाई कर रहा है, तो उसकी आंखें पूरी तरह स्वस्थ हैं। लेकिन हमेशा ऐसा नहीं होता।
बच्चों में vision से जुड़ी कई समस्याएं शुरुआत में आसानी से पहचानी नहीं जातीं। कुछ बच्चों को खुद यह समझ नहीं आता कि उनकी vision सामान्य से कम है, क्योंकि उन्होंने दुनिया को उसी तरह देखा होता है। अगर एक आंख दूसरी आंख की तुलना में कमजोर हो, तो बच्चा फिर भी रोजमर्रा के काम दूसरी आंख की मदद से कर सकता है।
इसी वजह से बच्चों में समय पर vision screening और eye examination महत्वपूर्ण है। खासकर squint यानी आंखों का टेढ़ापन, refractive error यानी चश्मे का नंबर और amblyopia यानी lazy eye जैसी समस्याओं को समय रहते पहचानना जरूरी हो सकता है।
इस article में हम आसान भाषा में समझेंगे कि बच्चे की आंखों की जांच किस उम्र में करवानी चाहिए, किन लक्षणों को ignore नहीं करना चाहिए, बच्चों में कौन-कौन से eye tests किए जाते हैं और किन बच्चों को ज्यादा बार eye specialist को दिखाने की जरूरत हो सकती है।
बच्चों की आंखों की जांच जरूरी क्यों है?
बच्चे के शुरुआती वर्षों में vision development बहुत महत्वपूर्ण होता है। इस दौरान दोनों आंखों से मिलने वाली visual information brain को सही तरीके से process करना सीखने में मदद करती है।
अगर किसी बच्चे की एक या दोनों आंखों में vision problem है और उसका समय पर पता नहीं चलता, तो visual development प्रभावित हो सकता है। उदाहरण के लिए, अगर एक आंख का refractive error दूसरी आंख से काफी अलग है, तो brain कमजोर आंख से मिलने वाली image को पर्याप्त रूप से इस्तेमाल नहीं कर सकता। ऐसी स्थिति में amblyopia यानी lazy eye विकसित हो सकती है।
इसीलिए बच्चों में vision problem का पता केवल तब लगाना जरूरी नहीं है जब बच्चा शिकायत करे। कई बार screening का उद्देश्य ऐसी समस्या को पहचानना होता है जिसके बारे में बच्चा खुद कोई शिकायत नहीं कर रहा होता।
USPSTF के अनुसार 3 से 5 वर्ष की उम्र के बच्चों में कम-से-कम एक बार vision screening से amblyopia या उसके risk factors का पता लगाने में मदद मिल सकती है।
बच्चों की आंखों की जांच किस उम्र में करवानी चाहिए?
इस सवाल का जवाब बच्चे की उम्र, symptoms, family history, birth history और किसी existing eye problem पर depend करता है।
एक practical age-wise approach इस तरह समझी जा सकती है:
- नवजात अवस्था: newborn examination में आंखों और red reflex की जांच की जा सकती है।
- 6 महीने से 1 साल: अगर कोई risk factor या abnormality दिखाई देती है, तो pediatric eye assessment जरूरी हो सकता है।
- 1 से 3 साल: vision screening और eye alignment assessment किया जा सकता है, खासकर risk factors या symptoms होने पर।
- 3 से 5 साल: इस उम्र में vision screening विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। USPSTF कम-से-कम एक बार screening की recommendation देता है।
- School age: school में screening होने के बावजूद अगर बच्चा symptoms दिखाता है, तो comprehensive eye examination करवाना चाहिए।
हर बच्चे के लिए examination schedule बिल्कुल एक जैसा नहीं होता। अगर बच्चे में पहले से कोई eye condition, family history या अन्य risk factor है, तो ophthalmologist अधिक frequent examinations की सलाह दे सकते हैं।
जन्म के बाद बच्चे की आंखों की जांच कब होती है?
नवजात बच्चे की आंखों की initial examination healthcare setting में की जा सकती है। इस examination का उद्देश्य आंखों की basic structure, pupil और red reflex जैसी चीजों में किसी obvious abnormality की पहचान करना होता है।
छोटे बच्चे standard eye chart पर letters नहीं पढ़ सकते। इसलिए infants और toddlers में vision assessment के लिए अलग techniques इस्तेमाल की जाती हैं।
उदाहरण के लिए doctor यह देख सकते हैं कि बच्चा किसी object या light को ठीक से follow कर रहा है या नहीं, दोनों आंखें एक साथ align हैं या नहीं और red reflex सामान्य दिखाई देता है या नहीं।
अगर newborn या infant में कोई abnormal finding हो, तो pediatric ophthalmologist द्वारा further evaluation की आवश्यकता हो सकती है।
6 महीने से 3 साल के बच्चे की आंखों की जांच
छोटे बच्चों में vision testing adults की तरह आसान नहीं होती। बच्चा letters या numbers पढ़ने में सक्षम नहीं हो सकता, इसलिए doctor age-appropriate techniques का उपयोग करते हैं।
इस उम्र में assessment में निम्न चीजें देखी जा सकती हैं:
- बच्चे की fixation और object को follow करने की ability
- दोनों आंखों का alignment
- Red reflex
- Pupil response
- आंखों की movement
- Refractive error के risk factors
- जरूरत पड़ने पर instrument-based screening
USPSTF के clinical evidence में छोटे बच्चों में autorefractors और photoscreeners जैसे instrument-based screening tools के उपयोग का भी उल्लेख किया गया है।
3 से 5 साल की उम्र में Eye Screening क्यों महत्वपूर्ण है?
3 से 5 वर्ष की उम्र बच्चों की vision screening के लिए एक महत्वपूर्ण period है। इस उम्र तक बहुत से बच्चे age-appropriate visual acuity tests में cooperate कर सकते हैं।
USPSTF 3 से 5 वर्ष के सभी बच्चों में कम-से-कम एक बार vision screening की recommendation देता है ताकि amblyopia या उसके risk factors को detect किया जा सके।
Screening में बच्चे की visual acuity, eye alignment और कुछ अन्य visual functions की जांच की जा सकती है।
अगर screening में कोई abnormal result आता है, तो बच्चे को complete eye examination के लिए ophthalmologist के पास refer किया जा सकता है।
इस उम्र में समस्या का पता चलना महत्वपूर्ण है क्योंकि vision development से जुड़ी कुछ conditions का treatment उम्र बढ़ने के साथ कम effective हो सकता है।
School जाने से पहले बच्चों की आंखों की जांच क्यों करवानी चाहिए?
बच्चे के लिए school शुरू करना एक बड़ा developmental milestone है। Classroom में बच्चे को board देखना, किताब पढ़ना, लिखना, चित्र पहचानना और आसपास की चीजों पर ध्यान देना होता है।
अगर बच्चे की vision ठीक नहीं है, तो वह:
- Board देखने में परेशानी महसूस कर सकता है।
- किताब को बहुत पास लाकर पढ़ सकता है।
- बार-बार आंखें मल सकता है।
- पढ़ते समय जल्दी थक सकता है।
- एक आंख बंद करके देखने की कोशिश कर सकता है।
- पढ़ाई में ध्यान लगाने में कठिनाई महसूस कर सकता है।
हालांकि पढ़ाई में परेशानी का कारण हमेशा vision problem नहीं होता। लेकिन अगर ऐसे signs लगातार दिखाई दें, तो eye examination करवाना उचित है।
बच्चों में आंखों की समस्या के कौन-कौन से लक्षण दिखाई दे सकते हैं?
बच्चे हमेशा यह नहीं बता पाते कि उन्हें धुंधला दिखाई दे रहा है। इसलिए parents को behavioral और visual signs पर ध्यान देना चाहिए।
1. बार-बार आंखें मलना
अगर बच्चा बार-बार आंखें मलता है, तो इसका कारण tiredness, allergy, dryness या vision-related problem हो सकती है। लगातार ऐसा होने पर eye examination करवाना बेहतर है।
2. आंखों को सिकोड़कर देखना
अगर बच्चा किसी दूर की चीज को देखने के लिए आंखें सिकोड़ता है, तो refractive error की संभावना हो सकती है।
3. किताब बहुत पास लाना
बच्चे का किताब या mobile screen को लगातार बहुत पास लाकर देखना vision assessment की जरूरत का संकेत हो सकता है।
4. TV के बहुत पास बैठना
TV के पास बैठना अकेले यह साबित नहीं करता कि बच्चे की आंखें कमजोर हैं। फिर भी अगर बच्चा लगातार बहुत पास जाकर screen देखता है और दूर की चीजें देखने में परेशानी होती है, तो eye check-up करवाया जा सकता है।
5. सिर को एक तरफ झुकाकर देखना
अगर बच्चा किसी चीज को देखने के लिए बार-बार सिर tilt करता है, तो आंखों के alignment या vision से जुड़ी समस्या की जांच की जरूरत हो सकती है।
6. एक आंख बंद करके देखना
कुछ बच्चे double vision या visual discomfort जैसी स्थिति में एक आंख बंद करके देखने की कोशिश कर सकते हैं। ऐसे behavior को ignore नहीं करना चाहिए।
7. आंखों का टेढ़ापन या Squint
अगर दोनों आंखें एक दिशा में ठीक से align नहीं हैं और एक आंख अंदर, बाहर, ऊपर या नीचे जाती हुई दिखाई देती है, तो ophthalmologist से evaluation करवाना जरूरी है।
8. सिरदर्द
लगातार headache कई कारणों से हो सकता है। अगर headache के साथ reading difficulty, blurred vision या आंखों में strain भी हो, तो eye examination helpful हो सकता है।
बच्चों में Squint क्या है?
Squint यानी strabismus ऐसी स्थिति है जिसमें दोनों आंखें एक ही direction में ठीक से align नहीं होतीं।
एक आंख सीधी दिखाई दे सकती है जबकि दूसरी आंख अंदर, बाहर, ऊपर या नीचे की ओर जा सकती है।
कुछ बच्चों में squint लगातार दिखाई देता है जबकि कुछ में यह केवल कभी-कभी दिखाई दे सकता है।
अगर बच्चे की आंखों में लगातार या intermittent squint दिखाई देता है, तो इसे केवल उम्र के साथ ठीक होने वाली सामान्य चीज मानकर लंबे समय तक इंतजार नहीं करना चाहिए। Pediatric ophthalmologist बच्चे की आंखों की alignment और vision development की जांच कर सकते हैं।
Lazy Eye यानी Amblyopia क्या है?
Amblyopia को सामान्य भाषा में lazy eye कहा जाता है। इसमें आंख की structure हमेशा खराब हो ऐसा जरूरी नहीं है; समस्या visual development और brain द्वारा उस आंख की image को effectively process करने से जुड़ी होती है।
Amblyopia का संबंध squint, unequal refractive error और कुछ अन्य eye conditions से हो सकता है।
अगर किसी बच्चे की एक आंख की vision दूसरी आंख से काफी कम है, तो brain मजबूत आंख की image को ज्यादा preference दे सकता है। समय के साथ कमजोर आंख की visual development प्रभावित हो सकती है।
इसीलिए बच्चों में vision problems को जल्दी पहचानना महत्वपूर्ण है। USPSTF के evidence review में untreated amblyopia और vision abnormalities के long-term consequences तथा age के साथ treatment effectiveness कम होने की बात कही गई है।
बच्चों की आंखों की जांच में कौन-कौन से Tests किए जाते हैं?
बच्चे की उम्र और cooperation के आधार पर eye tests अलग हो सकते हैं।
Visual Acuity Test
बच्चे को age-appropriate eye chart से letters, symbols या shapes पहचानने के लिए कहा जा सकता है।
Cover-Uncover Test
इस test से आंखों के alignment और strabismus की जांच में मदद मिल सकती है।
Red Reflex Test
यह test आंख के अंदर किसी obvious abnormality की screening में उपयोगी हो सकता है।
Autorefraction
Instrument-based testing से refractive error यानी चश्मे के नंबर का अनुमान लगाने में मदद मिल सकती है।
Photoscreening
Photoscreening छोटे बच्चों में amblyopia के risk factors और refractive errors की screening के लिए उपयोग की जा सकती है।
Comprehensive Eye Examination
अगर screening में abnormality मिले या child में symptoms हों, तो ophthalmologist complete eye examination कर सकते हैं।
क्या बच्चे को चश्मा लगने पर हमेशा आंखें कमजोर हो जाती हैं?
नहीं। चश्मा vision को कमजोर नहीं करता।
अगर बच्चे को refractive error है और doctor ने glasses prescribe किए हैं, तो सही prescription का चश्मा पहनना vision development और daily visual activities के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।
Parents को बच्चे के चश्मे को केवल इसलिए बंद नहीं करना चाहिए कि बच्चा कुछ दिनों के बाद बिना चश्मे के भी ठीक दिखाई देने की बात कहता है। Prescription glasses के उपयोग के बारे में ophthalmologist की सलाह follow करनी चाहिए।
बच्चों में Myopia क्या है?
Myopia को सामान्य भाषा में short-sightedness या निकट दृष्टिदोष कहा जाता है। इसमें बच्चा पास की चीजें relatively clear देख सकता है लेकिन दूर की चीजें blurry दिखाई दे सकती हैं।
स्कूल जाने वाले बच्चों में myopia का पता कई बार classroom में board देखने में परेशानी से चलता है।
अगर बच्चा board देखने के लिए आंखें सिकोड़ता है, बार-बार आंखों को rub करता है या classroom activities में दूर की चीजों पर ध्यान देने में परेशानी महसूस करता है, तो eye examination करवाना चाहिए।
क्या ज्यादा Screen Time बच्चों की आंखों को प्रभावित करता है?
आजकल बच्चे smartphones, tablets, computers और television का काफी उपयोग करते हैं। लंबे समय तक screen देखने से कुछ बच्चों में eye strain, dryness या temporary visual discomfort हो सकता है।
लेकिन हर vision problem का कारण केवल screen time मान लेना सही नहीं है। बच्चे की refractive error, eye alignment और अन्य eye conditions की भी जांच जरूरी है।
Parents को बच्चों के screen use के साथ regular breaks, outdoor activities और उचित viewing distance जैसी healthy habits पर ध्यान देना चाहिए।
अगर बच्चा screen देखने के बाद लगातार आंखों में दर्द, headache, blurred vision या excessive rubbing की शिकायत करता है, तो eye specialist से सलाह लेना उचित है।
किन बच्चों को ज्यादा जल्दी Eye Specialist को दिखाना चाहिए?
कुछ बच्चों में routine screening के अलावा जल्दी comprehensive eye examination की जरूरत हो सकती है।
- जिस बच्चे की आंखें टेढ़ी दिखाई देती हों।
- जिसकी एक आंख दूसरी से अलग direction में जाती हो।
- जिस बच्चे को लगातार blurred vision की शिकायत हो।
- जिसे बार-बार headache या visual discomfort होता हो।
- जो एक आंख बंद करके देखने की कोशिश करता हो।
- जिसकी family history में significant eye disease हो।
- जो premature पैदा हुआ हो या low birth weight रहा हो और doctor ने eye follow-up की सलाह दी हो।
- जिसे पहले से eye disease या eye injury रही हो।
- जिसे पहले से glasses या अन्य eye treatment prescribed हो।
USPSTF के अनुसार family history, prematurity, low birth weight, strabismus और refractive errors जैसे factors बच्चों में amblyopia या vision abnormalities के risk से जुड़े हो सकते हैं।
अगर बच्चे को कोई समस्या नहीं है तो भी Eye Check-up जरूरी है?
कई मामलों में हां। यही बच्चों की eye screening का मुख्य उद्देश्य है।
बच्चे को यह पता ही नहीं हो सकता कि वह दूसरे बच्चों की तुलना में कम साफ देख रहा है। खासकर अगर समस्या एक आंख में हो, तो बच्चा दूसरी आंख की मदद से सामान्य activities कर सकता है।
इसलिए केवल बच्चे की शिकायत पर निर्भर रहने के बजाय age-appropriate vision screening महत्वपूर्ण है।
USPSTF 3 से 5 वर्ष की उम्र में कम-से-कम एक बार vision screening की recommendation देता है। अलग-अलग professional organizations comprehensive eye examinations के timing को अलग तरह से describe कर सकती हैं, इसलिए individual child के लिए schedule pediatrician या ophthalmologist से तय करना बेहतर है।
बच्चों की आंखों की जांच में Parents को क्या बताना चाहिए?
Eye specialist के पास जाते समय parents को बच्चे की medical और family history की relevant जानकारी देनी चाहिए।
- परिवार में चश्मे या eye disease का history
- बच्चे का जन्म समय से पहले हुआ था या नहीं
- Birth weight की जानकारी
- पहले कभी eye infection या injury हुई हो
- बच्चा screen कितना use करता है
- किसी आंख का squint दिखाई देता है या नहीं
- Headache या blurred vision की शिकायत
- पहले से glasses prescribed हैं या नहीं
बच्चों की आंखों को स्वस्थ रखने के लिए Parents क्या कर सकते हैं?
बच्चों की आंखों की health के लिए केवल eye examination ही महत्वपूर्ण नहीं है। Daily habits भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
- बच्चे को balanced diet दें।
- उम्र के अनुसार outdoor activity के लिए समय दें।
- Reading और screen use के दौरान उचित distance रखें।
- लंबे समय तक लगातार screen देखने से breaks लेने की आदत बनाएं।
- आंखों में चोट से बचने के लिए खेलों और activities में appropriate eye protection का उपयोग करें।
- अगर doctor ने glasses prescribe किए हैं तो उन्हें सही तरीके से पहनाएं।
- Eye drops या medicines अपने मन से न दें।
- बच्चे की vision में कोई बदलाव दिखाई दे तो examination करवाएं।
क्या School Vision Screening Comprehensive Eye Examination के बराबर है?
नहीं। School या community-based vision screening एक useful screening step हो सकती है, लेकिन इसका उद्देश्य हर प्रकार की eye disease का complete diagnosis करना नहीं होता।
अगर screening में कोई abnormal result आता है या बच्चे में symptoms हैं, तो complete eye examination की जरूरत हो सकती है।
इसी तरह अगर school screening normal आई है लेकिन parents को बच्चे की आंखों में कोई समस्या दिखाई दे रही है, तो केवल screening report पर निर्भर नहीं रहना चाहिए।
Sangam Super Speciality Eye Hospital में बच्चों की Eye Check-up
अगर आपको अपने बच्चे की vision को लेकर कोई चिंता है, जैसे आंखों का टेढ़ापन, बार-बार आंखें मलना, किताब बहुत पास लाकर पढ़ना, दूर की चीजें देखने में परेशानी या frequent headaches, तो eye specialist से consultation करवाना उचित है।
Sangam Super Speciality Eye Hospital, Taramandal, Gorakhpur में बच्चे की उम्र और symptoms के अनुसार eye examination और आवश्यक vision assessment के बारे में ophthalmologist से सलाह ली जा सकती है।
बच्चों में eye problem को जल्दी पहचानना महत्वपूर्ण है क्योंकि कुछ vision conditions का treatment early childhood में अधिक प्रभावी हो सकता है। इसलिए बच्चे के symptoms को “उम्र के साथ ठीक हो जाएगा” मानकर लंबे समय तक ignore करने के बजाय उचित medical evaluation करवाना बेहतर है।
क्या आपके बच्चे की आंखों की जांच अभी तक नहीं हुई है?
बच्चे हमेशा यह नहीं बता पाते कि उन्हें कम दिखाई दे रहा है। अगर आपका बच्चा बार-बार आंखें मलता है, आंखें सिकोड़कर देखता है, किताब बहुत पास लाता है, एक आंख बंद करके देखता है या उसकी आंखें टेढ़ी दिखाई देती हैं, तो eye examination करवाएं।
अगर कोई obvious symptom नहीं भी है, तो बच्चे की उम्र और risk factors के अनुसार vision screening के बारे में pediatrician या ophthalmologist से सलाह लें।
बच्चे की अच्छी vision उसके learning और development का महत्वपूर्ण हिस्सा है। समय पर Eye Check-up करवाएं।
👉 Child Eye Check-up के लिए Appointment Book करें
📞 Call: +91 757 000 8880
📍 Location: Sangam Super Speciality Eye Hospital, In Front of Vasundhara Enclave, Taramandal, Gorakhpur, Uttar Pradesh – 273010
Frequently Asked Questions (FAQs)
बच्चों की आंखों की जांच कब करवानी चाहिए?
बच्चे की आंखों की जांच का समय उसकी उम्र और risk factors पर depend करता है। USPSTF 3 से 5 वर्ष की उम्र के सभी बच्चों में कम-से-कम एक बार vision screening की recommendation देता है। Symptoms या risk factors होने पर इससे पहले भी eye examination की आवश्यकता हो सकती है।
क्या नवजात बच्चे की आंखों की जांच होती है?
हां। Newborn examination में आंखों की basic assessment और red reflex जैसी जांच की जा सकती है। अगर कोई abnormality मिले तो further ophthalmic evaluation की आवश्यकता हो सकती है।
क्या 3 साल के बच्चे की आंखों का test हो सकता है?
हां। लगभग 3 वर्ष की उम्र में बच्चे की cooperation के अनुसार age-appropriate visual acuity screening की कोशिश की जा सकती है। छोटे बच्चों में instrument-based screening भी उपयोगी हो सकती है।
बच्चे की आंखें टेढ़ी हों तो क्या करें?
अगर बच्चे की आंखें लगातार या कभी-कभी टेढ़ी दिखाई देती हैं, तो pediatric ophthalmologist या ophthalmologist से examination करवाना चाहिए। Squint को लंबे समय तक ignore नहीं करना चाहिए।
क्या बच्चे को चश्मा लगने से आंखें कमजोर हो जाती हैं?
नहीं। सही prescription का चश्मा आंखों को कमजोर नहीं करता। अगर बच्चे को refractive error है, तो doctor द्वारा prescribed glasses vision को स्पष्ट करने और visual development में मदद कर सकते हैं।
क्या बच्चे के लिए Eye Check-up जरूरी है अगर वह कोई शिकायत नहीं करता?
हां, क्योंकि छोटे बच्चों को यह समझ नहीं आ सकता कि उनकी vision सामान्य से कम है। Vision screening का उद्देश्य ऐसी problems को भी पहचानना है जिनकी बच्चे को खुद शिकायत नहीं होती।
बच्चे की आंखों में कौन-कौन से लक्षण चिंता का कारण हो सकते हैं?
बार-बार आंखें मलना, आंखें सिकोड़ना, एक आंख बंद करके देखना, सिर को एक तरफ झुकाकर देखना, लगातार headache, blurred vision, पढ़ने में परेशानी और आंखों का टेढ़ापन जैसे signs होने पर eye examination करवाना चाहिए।
क्या School Eye Test पर्याप्त है?
School vision screening useful है, लेकिन यह complete eye examination के बराबर नहीं है। अगर screening abnormal हो या बच्चे में symptoms हों, तो ophthalmologist से comprehensive examination करवाना चाहिए।
क्या ज्यादा Screen Time से बच्चे की आंखें खराब हो जाती हैं?
लंबे समय तक screen देखने से eye strain या temporary discomfort हो सकता है, लेकिन हर vision problem का कारण केवल screen time नहीं होता। अगर बच्चा लगातार blurred vision, headache या eye discomfort की शिकायत करता है, तो eye specialist से जांच करवाएं।
बच्चों की आंखों की जांच कितनी बार करवानी चाहिए?
इसका कोई एक universal schedule हर बच्चे पर लागू नहीं होता। उम्र, family history, previous eye problems और risk factors के आधार पर ophthalmologist examination frequency तय कर सकते हैं। 3 से 5 वर्ष की उम्र में कम-से-कम एक vision screening की USPSTF recommendation है।
निष्कर्ष
बच्चों की आंखों की जांच केवल तब नहीं करवानी चाहिए जब बच्चा यह कहे कि उसे कम दिखाई दे रहा है। कई vision problems बच्चों में बिना स्पष्ट शिकायत के मौजूद हो सकती हैं।
विशेष रूप से छोटे बच्चों में यह पता लगाना मुश्किल हो सकता है कि उनकी एक आंख कमजोर है या दोनों आंखों की vision सामान्य से कम है। बच्चा अपने आसपास की दुनिया को उसी तरह देखता है जैसा उसे दिखाई देता है, इसलिए उसे यह पता नहीं होता कि उसकी vision में कोई कमी है।
3 से 5 वर्ष की उम्र में vision screening महत्वपूर्ण है और USPSTF इस age group में कम-से-कम एक बार screening की recommendation देता है। छोटे बच्चों में physical examination, fixation/follow assessment, red reflex, eye alignment assessment और आवश्यकता के अनुसार instrument-based screening का उपयोग किया जा सकता है।
अगर बच्चे की आंखें टेढ़ी दिखाई देती हैं, वह बार-बार आंखें मलता है, दूर की चीजें देखने में परेशानी होती है, किताब बहुत पास लाकर पढ़ता है, एक आंख बंद करके देखता है या बार-बार headache की शिकायत करता है, तो routine appointment का इंतजार करने के बजाय eye specialist से consultation करवाना बेहतर है।
Parents को यह भी याद रखना चाहिए कि school screening और comprehensive eye examination एक ही चीज नहीं हैं। Screening में abnormal result आने पर या symptoms होने पर complete ophthalmic evaluation की आवश्यकता हो सकती है।
बच्चे की vision उसके learning, reading, coordination और daily development का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसलिए समय पर vision screening और जरूरत पड़ने पर appropriate treatment बच्चे की आंखों की health के लिए महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।
अगर आपको अपने बच्चे की आंखों को लेकर कोई चिंता है, तो symptoms को ignore न करें और qualified ophthalmologist से उचित जांच करवाएं।
Disclaimer: यह article केवल general eye-health awareness और patient education के उद्देश्य से है। यह किसी बच्चे के लिए diagnosis या personalized medical advice का विकल्प नहीं है। बच्चे की आंखों की जांच और treatment के लिए qualified ophthalmologist से consultation लें।

Dr. Y. Singh (MBBS, MS Ophthalmology)
Chief Ophthalmic Surgeon at Sangam Super Speciality Eye Hospital. Expert in Micro-Incision Phaco Cataract Surgery, Blade-Free LASIK, and Glaucoma management.

